ग्रंथसार
ऋषि परंपरा का पूर्ण सार केवल ज्ञान संचय में नहीं, बल्कि उस दृष्टि में निहित है जो समस्त जगत को एक अखंड चेतना के रूप में देखती है।
ऋषि परम्परा · पाठ 10
ऋषि दृष्टि का शाश्वत अवबोध