ग्रंथसार
घोर अंधकार में भटकते उस अनाथ बालक पर जब एक संत की करुणामय दृष्टि पड़ी, तो जैसे स्वयं प्रभु ने ही उसकी सुधि ले ली हो।
गोस्वामी तुलसीदास · पाठ 2
गुरु नरहरिदास और राम कथा