ग्रंथसार
अपने आराध्य प्रभु श्रीराम के साक्षात दर्शन की एक तीव्र अभिलाषा गोस्वामी तुलसीदास जी के हृदय में दिन-रात अग्नि की भाँति प्रज्वलित रहती थी।
गोस्वामी तुलसीदास · पाठ 4
तुलसीदास को हनुमान जी और श्रीराम के दर्शन