ग्रंथसार
कथा केवल शब्दों का उच्चारण नहीं है, बल्कि यह एक जीवित संस्कार है जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी हमारी सामूहिक चेतना को गढ़ता है।
व्यास और कथावाचक परम्परा · पाठ 6
कथा परंपरा