ग्रंथसार
ज्ञान का प्रवाह केवल शब्दों का हस्तांतरण नहीं, बल्कि एक जीवंत हृदय से दूसरे हृदय तक पहुँचने वाली चेतना है।
व्यास और कथावाचक परम्परा · पाठ 7
गुरु-शिष्य स्मृति-परंपरा