ग्रंथसार
एक बालक, जिसके नटखटपन से उसकी माँ भी तंग आ जाती थीं, पर जिसकी आँखों में एक अद्भुत तेज और मन में ईश्वर को पाने की एक गहरी प्यास थी।
स्वामी विवेकानंद · पाठ 1
नरेंद्रनाथ का बचपन