ग्रंथसार
धूल भरी पगडंडियों से हिमालय की कंदराओं तक, नाथ योगियों की वाणी भीतर छिपे उस असीम आनंद की पुकार है जो समय की सीमाओं से परे है।
योगी और आधुनिक गुरु · पाठ 1
नाथ योगी और सिद्ध परंपरा