ग्रंथसार
गुरु और शिष्य का मिलन केवल शब्दों का आदान-प्रदान नहीं, बल्कि एक चेतना का दूसरी चेतना में प्रवाहित होने का मौन अनुभव है।
योगी और आधुनिक गुरु · पाठ 9
गुरु-शिष्य परंपरा का स्वरूप