ग्रंथसार
एक नर्तक या अभिनेता का शरीर केवल मांस-मज्जा का पुंज नहीं, बल्कि अनंत भावनाओं का एक जीवंत उपकरण है।
नाट्य और शिल्प · पाठ 4
अभिनय और प्रशिक्षित देह