ग्रंथसार
मंच केवल लकड़ी का एक चबूतरा नहीं, बल्कि एक ऐसा सूक्ष्म क्षेत्र है जहाँ कलाकार और दर्शक एक ही चेतना के दो छोर बन जाते हैं।
नाट्य और शिल्प · पाठ 5
मंच और दर्शक का एकीकरण