ग्रंथसार
गुरुदेव, जिस मर्यादा की नींव पर हमारा समाज टिका है, क्या वह कोई विवशता है या समय के गर्भ से उपजी कोई जीवन-कला?
धर्म सूत्र · पाठ 1
धर्म के मूल स्रोत