ग्रंथसार
क्या धर्म की धारा किसी एक तट पर ठहरती है, या वह हर युग की बदलती परिस्थितियों के साथ अपनी दिशा स्वयं चुनती है?
धर्म सूत्र · पाठ 8
धर्म के विविध स्वर और परंपराएं