ग्रंथसार
प्रकृति के बदलते चरणों में छिपे जीवन के गहरे अर्थों को समझना ही वास्तविक विद्या है।
गृह्य सूत्र · पाठ 6
ऋतुओं का अर्पण और कृतज्ञता