ग्रंथसार
गुरुदेव की कुटिया में जलती हुई धूनी के पास बैठकर देवरात ने उस अंतिम प्रश्न को रखा, जिसने पूरी यात्रा को एक नया अर्थ दे दिया।
श्रौत सूत्र · पाठ 10
पवित्र अग्नि की शाश्वत विरासत