ग्रंथसार
गंगा और यमुना के उद्गम की यात्रा केवल पर्वतों की चढ़ाई नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर छिपे पवित्र जल के स्रोतों को खोज लेने का एक आध्यात्मिक संकल्प है।
हिमालय तीर्थ · पाठ 5
गंगोत्री और यमुनोत्री: जीवन का स्रोत