ग्रंथसार
क्या आपने कभी सोचा है कि जब संसार के सारे उपचार विफल हो जाते हैं, तब कौन सा दिव्य बल हमें भीतर से स्वस्थ करता है?
द्वादश ज्योतिर्लिंग · पाठ 10
वैद्यनाथ: परम वैद्य का धाम