ग्रंथसार
क्या आपने कभी सोचा है कि जीवन की कठिन पहाड़ियों को पार करना ही स्वयं के भीतर छिपे परम आनंद को पाने का मार्ग है?
द्वादश ज्योतिर्लिंग · पाठ 3
द्वितीय ज्योतिर्लिंग: मल्लिकार्जुन