ग्रंथसार
काल के चक्र में उलझा हुआ मनुष्य जब महाकाल की शरण में जाता है, तो समय उसका शत्रु नहीं, मित्र बन जाता है।
द्वादश ज्योतिर्लिंग · पाठ 4
तृतीय ज्योतिर्लिंग: महाकालेश्वर