ग्रंथसार
नदी के तट पर खड़े होकर जब हम उसकी कल-कल ध्वनि सुनते हैं, तब हमें यह अनुभव होता है कि वह मात्र जल नहीं, बल्कि स्वयं चेतना की एक जीवंत धारा है।
नदी तीर्थ · पाठ 1
नदियों के प्रति श्रद्धा का भाव