ग्रंथसार
नदी के बहते जल में केवल जल नहीं, बल्कि काल का वह अनंत प्रवाह है जो हमें हमारे स्वयं के अस्तित्व का बोध कराता है।
नदी तीर्थ · पाठ 10
अनंत प्रवाह