ग्रंथसार
गंगा की निर्मलता, यमुना की प्रीति और सरस्वती की अंतर्धारा ही वह त्रिवेणी है जो मनुष्य को भौतिक तट से उठाकर आत्मिक सागर की ओर ले जाती है।
नदी तीर्थ · पाठ 2
गंगा, यमुना और सरस्वती का पावन संगम