ग्रंथसार
नदियों के संगम पर केवल जल का मिलन नहीं होता, बल्कि वहाँ आत्मा अपनी धाराओं को अनंत के सागर में विलीन होते देखती है।
नदी तीर्थ · पाठ 4
पवित्र संगम की महिमा