ग्रंथसार
नदी के निर्मल जल में डुबकी लगाना मात्र शरीर की शुद्धि नहीं, बल्कि आत्मा का एक नवीन संस्कार है।
नदी तीर्थ · पाठ 5
स्नान: एक आत्मिक अनुशासन