ग्रंथसार
नदियों के तट पर जलते हुए दीप केवल प्रकाश नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी अटूट कृतज्ञता की लौ हैं।
नदी तीर्थ · पाठ 6
नदी उत्सव और श्रद्धा का पारिस्थितिकी तंत्र