ग्रंथसार
नदी के तट पर बैठा व्यक्ति केवल जल नहीं देखता, अपितु स्वयं के अस्तित्व का जीवंत दर्शन करता है।
नदी तीर्थ · पाठ 8
नदी: एक मूक शिक्षिका