ग्रंथसार
सरयू के पावन तट पर बसी अयोध्या केवल एक नगरी नहीं, बल्कि मानव हृदय में मर्यादा का वह दीप है जो युगों-युगों से कभी बुझता नहीं।
सप्त पुरी · पाठ 4
अयोध्या का पावन प्रांगण