ग्रंथसार
मथुरा के घाटों पर जब यमुना की लहरें थपकियाँ देती हैं, तो ऐसा प्रतीत होता है मानो समय स्वयं ठहरकर किसी बाँसुरी की गूँज सुन रहा हो।
सप्त पुरी · पाठ 5
मथुरा की अलौकिक लीला