ग्रंथसार
क्या तुमने कभी सोचा है कि समुद्र के तट पर खड़ा एक नगर, केवल पत्थर और चूने का ढांचा नहीं, बल्कि स्वयं ईश्वर का खुला हुआ द्वार कैसे हो सकता है?
सप्त पुरी · पाठ 9
द्वारका का शाश्वत द्वार