ग्रंथसार
शक्ति पीठों की धूल में जो दैवीय स्पंदन छिपा है, उसे पहचानने के लिए हृदय में भक्त का भाव और जिज्ञासा का दीपक होना अनिवार्य है।
शक्ति पीठ · पाठ 1
शक्ति पीठ का अर्थ