ग्रंथसार
शक्ति पीठ केवल पत्थरों की वेदी नहीं, बल्कि भीतर सोई हुई उस अनंत चेतना को जगाने का महायज्ञ है, जो हर भय को भस्म कर सकती है।
शक्ति पीठ · पाठ 8
साहस और रूपांतरण