ग्रंथसार
शक्तिपीठों के पावन धामों में केवल पत्थरों का वैभव नहीं, बल्कि माँ की सांसें धड़कती हैं।
शक्ति पीठ · पाठ 9
माँ की जीवंत उपस्थिति