ग्रंथसार
आत्मा ही वह परम सत्य है जिसमें समस्त दृश्य जगत का लय और उद्भव समाहित है।
ऐतरेय उपनिषद् · उपनिषद् 11
संपूर्ण का आशय: एक बोध