ग्रंथसार
देव, मनुष्य और असुर—तीनों ने एक ही दिव्य ध्वनि को अपने-अपने स्वभाव के अनुरूप कैसे ग्रहण किया?
बृहदारण्यक उपनिषद् · उपनिषद् 10
तीन दैवीय अनुशासन