ग्रंथसार
ज्ञान की खोज में अहंकार का नहीं, बल्कि तर्कों की प्रखरता और शालीनता का स्थान होता है।
बृहदारण्यक उपनिषद् · उपनिषद् 11
शालीनतापूर्ण संवाद की परंपरा