ग्रंथसार
अक्षर ब्रह्म की उस अदृश्य सत्ता का बोध, जिसके धागों से यह संपूर्ण ब्रह्मांड एक वस्त्र की भांति बुना हुआ है।
बृहदारण्यक उपनिषद् · उपनिषद् 13
ब्रह्मांड के ताने-बाने का बुनकर