ग्रंथसार
गुरुदेव की शांत कुटिया में मौन की गहराई से उपनिषदों का वह परम सत्य प्रकट हुआ, जहाँ शब्दों के शोर का अंत हो जाता है।
बृहदारण्यक उपनिषद् · उपनिषद् 15
संदेह से अंतिम मुक्ति