ग्रंथसार
ज्ञान का अनंत महावन केवल शब्दों का कोलाहल नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर छिपे उस सत्य की गूंज है, जो हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाती है।
बृहदारण्यक उपनिषद् · उपनिषद् 16
ज्ञान का अनंत महावन