ग्रंथसार
मिथिला के राजदरबार में ब्रह्मज्ञान की एक ऐसी परीक्षा आरंभ होती है, जहाँ सांसारिक ऐश्वर्य और आत्मिक ज्ञान का आमना-सामना होता है।
बृहदारण्यक उपनिषद् · उपनिषद् 2
राजा जनक की सभा और याज्ञवल्क्य