ग्रंथसार
ब्रह्मांड की प्रत्येक इकाई एक-दूसरे के अमृत का आधार है, जहाँ सब कुछ एक-दूसरे में अनुस्यूत होकर एक अखंड मधुचक्र का निर्माण करता है।
बृहदारण्यक उपनिषद् · उपनिषद् 7
मधु विद्या: परस्पर निर्भरता का सिद्धांत