ग्रंथसार
स्वप्न और गहरी नींद के अनुभव यह सिद्ध करते हैं कि आत्मा शरीर, इंद्रियों और मन से परे एक स्वतंत्र और स्वप्रकाश सत्ता है।
बृहदारण्यक उपनिषद् · उपनिषद् 8
स्वप्न और सुषुप्ति: आत्म-तत्त्व का प्रमाण