ग्रंथसार
मृत्यु के उपरांत देह और आत्मा के सूक्ष्म संबंधों की मीमांसा ही इस यात्रा का मर्म है।
बृहदारण्यक उपनिषद् · उपनिषद् 9
मरण और आत्मा की गति