ग्रंथसार
क्या प्रेम का अर्थ केवल बाहर की वस्तुओं में सुख खोजना है, या यह हमारी अपनी ही आत्मा का एक सूक्ष्म प्रतिबिंब है?
छान्दोग्य उपनिषद् · उपनिषद् 11
प्रेम और आत्मा