ग्रंथसार
गुरुदेव की कुटिया में आज सन्नाटा नहीं, बल्कि छान्दोग्य उपनिषद की उन असंख्य ध्वनियों का प्रतिध्वनित होने वाला अंतिम स्वर गूंज रहा है।
छान्दोग्य उपनिषद् · उपनिषद् 16
पूर्णता का बोध