ग्रंथसार
क्या तुमने कभी सोचा है कि जीवन के संघर्षों और अनुभवों के पीछे कौन सा अदृश्य मिठास छिपा है?
छान्दोग्य उपनिषद् · उपनिषद् 2
मधुविद्या का अमृत