ग्रंथसार
सत्य का मार्ग केवल शब्दों का खेल नहीं, बल्कि हृदय की वह अडिग निष्ठा है जो मनुष्य को भीतर से प्रकाशित कर देती है।
छान्दोग्य उपनिषद् · उपनिषद् 3
सत्यकाम और सत्य की निष्ठा