ग्रंथसार
क्या ज्ञान केवल पोथियों के पन्नों में सिमटा है, या वह सत्य कहीं हमारे भीतर ही स्पंदित हो रहा है?
छान्दोग्य उपनिषद् · उपनिषद् 6
श्वेतकेतु का गर्व और पिता की सीख