ग्रंथसार
क्या तुमने कभी विचार किया है कि हम जिसे अपनी पहचान समझते हैं, वह कहीं अज्ञान की पट्टियों से ढका हुआ सत्य तो नहीं?
छान्दोग्य उपनिषद् · उपनिषद् 9
आंखों पर पट्टी और पथ