ग्रंथसार
गुरुदेव, आज की भागती-दौड़ती दुनिया में उपनिषदों की शांति का भला क्या स्थान हो सकता है?
ईश उपनिषद् · उपनिषद् 10
आज के पाठक से उपनिषद की अपेक्षा