ग्रंथसार
गुरुदेव की कुटिया में संध्या की शांत बेला में, देवरात के हृदय में उपनिषदों की पूरी यात्रा का सार समाहित होने लगा।
ईश उपनिषद् · उपनिषद् 11
अंतिम चिंतन