ग्रंथसार
क्या कभी आपने सोचा है कि जिस क्षण हम दूसरों को स्वयं से अलग मानना छोड़ देते हैं, उस क्षण हमारे भीतर का सारा कोलाहल कहाँ विलीन हो जाता है?
ईश उपनिषद् · उपनिषद् 7
शोक और मोह का अंत